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सियाट में 23 बालिकाआें को बांटी साइकिल

सियाटग्राम के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 9 वीं की 23 बालिकाआें को समारोहपूर्वक साईकिल वितरित की गई।

जाडन.राजकीयआदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय जाडन में राज्य सरकार द्वारा प्राप्त 35 साइकिलें कक्षा नवमीं की छात्राआें को निशुल्क वितरण की गई।

मारवाड़जंक्शन. बाड़सागांव में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बालिकाआें को साइकिल वितरित की गई।
जैतारण| क्षेत्रके राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में 71 बालिकाआें का साईकिल वितरण की गई।

इसी तरह रानीवाल के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हीरालाल सीरवी, रविंद्रसिंह चारण, बुधाराम सुथार के सान्निध्य में बालिकाआें को साईकिल वितरण की गई।

पिपलियाकलां | गांवके सुंदरबाई राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में 59 छात्राओं को साइकिल वितरण की गई।

देसूरी| राजकीयआदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय बागोल में 15 छात्राओं को साइकिल वितरण की गई।

अवैध तरीके से मिट्टी खुदाई कर बेचने के विरोध में सौंपा ज्ञापन

सोजत | मंडलाके वार्डपंचों सहित पंचायत के नागरिकों ने एसडीएम मुकेश चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गांव में सिवाय चक भूमि में सरपंच उसके पति द्वारा अवैध तरीके से जेसीबी लगा कर मिट्टी की खुदाई कर उसे बेचने पर कार्रवाई करने की मांग की है। वार्डपंच सोनाराम, कन्या देवी आदि की उपस्थिति में पंचायत के नागरिकों ने ज्ञापन में एसडीएम को बताया कि गांव में सिवाय चक भूमि पर सरपंच उसके पति द्वारा जेसीबी लगा कर खुदाई करते हुए उसकी मिट्टी को बेचान कर सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा गलत तरीके से मिट्टी बेचने पर सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ है। ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई करना जरूरी है। इस मौके कई ग्रामीण उपस्थित थे।

तीर्थाटन के बाद रेपड़ावास में प्रसादी कर रही थी महिलाएं धुएंसे भड़की मधुमक्खियों का हमला, ढोल बजा रहे युवक की मौत, 20 महिलाएं जख्मी

शिवपुराथाना इलाके के रेपड़ावास गांव में बुधवार को हरिद्वार समेत अन्य तीर्थस्थलों का दर्शन करने के लौटने की खुशी में आयोजित प्रसादी के दौरान धुएं से मधुमक्खियां अचानक भड़क गई। मधुमक्खियों ने वहां मौजूद दो दर्जन से अधिक महिलाओं को काट लिया। इस दौरान मौके पर ढोल बजा रहे युवक के शरीर पर कई स्थानों पर काटने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना से पूरे गांव में मातम का माहौल बन गया। घायल महिलाओं को उपचार के लिए सोजत के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। इसमें 4 महिलाओं की हालत चिंताजनक बनी हुई है। 15 दिन में जिले में यह मधुमक्खियों के काटने से यह दूसरी मौत हुई है।

जानकारी के अनुसार रेपड़ावास गांव में रहने वाली जाट समाज की महिलाएं कुछ दिन पहले हरिद्वार समेत प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन करने के लिए गई थी। वे दो दिन पहले ही वापस अपने गांव लौटी है। तीर्थाटन से वापस लौटने की खुशी में बुधवार को गांव में प्रसादी का आयोजन किया गया था। महिलाओं ने लापसी के साथ ही अन्य खाना भी बनाया था। भाेग लगाने के दौरान धुएं से वहां मौजूद मधुमक्खियां भड़क गई तथा वहां मौजूद लोगों पर हमला बोल दिया। घटना से अफरातफरी का माहौल बन गया। वहां मौजूद ढोल बजाने वाले जेठाराम पुत्र जयराम वादी को मधुमक्खियों ने ज्यादा काटा। उसके पूरे शरीर पर डंक मारे, जिससे उसकी कुछ देर बाद मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 20 अन्य महिलाएं गंभीर रूप से जख्मी हो गई। मामले की जानकारी मिलने पर शिवपुरा थाने से हेड कांस्टेबल पुखराज पटेल पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे तथा घायलों को उपचार के लिए सोजत के सरकारी अस्पताल में भेजा। शव का पोस्टमार्टम गुरुवार को कराया जाएगा।

3नवंबर को जोजावर में भी पीटीआई की मधुमक्खियों के काटने से हो चुकी मौत : गौरतलबहै कि गत 3 नवंबर को लाटौती गांव का रतनाराम पटेल करीब 12 साल तक पांचेटिया स्कूल में पीटीआई के पद पर तैनात था। वह बाइक पर स्कूल जा रहा था कि रास्ते में पेड़ पर लटक रहा मधुमक्खियों का छत्ता अचानक उस पर गिर गया। मधुमक्खियों के हमले से वह बुरी तरह घायल होकर बेहोश हो गया था।
उसकी बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। डॉक्टरों का कहना था कि मधुमक्खियों के डंक से ज्यादा जहर शरीर में जाने से उसकी मौत हो गई।

विशेषज्ञ का कहना – मधुमक्खियों के डंक में जहर होता है, जिसका तुरंत उपचार जरूरी

मधुमक्खीका शहद जितना मीठा होता है। उससे भी ज्यादा उसका डंक घातक होता है। मधुमक्खी अगर डंक मार दे तो उस जगह पर सूजन तो ही जाती है साथ ही तेज दर्द भी शुरू हो जाता है। मधुमक्खी या दूसरे कीट नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि आत्मरक्षा में डंक मारते हैं या काटते हैं. मधुमक्खियों के डंक में जहर होता है जिससे शरीर में संक्रमण हो जाता है। हालांकि हर किसी में इसके अलग-अलग लक्षण नजर आते हैं। कुछ लोगों को तेज दर्द होता है तो कुछ में केवल प्रभावित जगह पर सूजन जाती है। कुछ में वो जगह लाल पड़ जाती है।

पहले खून की थैली टैक्स फ्री थी, जनवरी से 1 यूनिट के चुकाने होंगे 1250 रु.

 अस्पतालोंमें मरीजों को मिलने वाला खून पर भी जीएसटी का मार पड़ने जा रही है। अब तक खून की थैली पर किसी तरह का टैक्स नहीं था, मगर अब थैली पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाने के बाद राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल 1 जनवरी से खून महंगा करने जा रही है। अब ब्लड बैंक से निजी अस्पतालों को दिए जाने वाले खून पर जीएसटी भी चुकाना होगा। यानी अब तक एक यूनिट खून 1050 रुपए में मिलता था। टैक्स लगने के बाद अब 1250 रुपए चुकाने होंगे जिले में प्रतिदिन में 60 से अधिक यूनिट अन्य अस्पतालों को दिया जाता है। इसमें पाली स्थित ब्लड बैंक से सर्वाधिक खून भेजा जाता है। खून भेजने के मामले में सोजत तथा सुमेरपुर स्थित ब्लड बैंकों से भी निजी अस्पतालों को भेजा जाता है। 

आधिकारिक जानकारी के अनुसार अस्पतालों में मिलने वाले ब्लड पर भी 12.5 फीसदी जीएसटी लागू किया गया है। इस वजह से राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने ब्लड बैंकों से मिलने वाले ब्लड के दाम बढ़ा दिए हैं। जिले में हर महीने 1800 मरीजों को ब्लड की जरूरत होती है। थैली पर जीएसटी लगाने के बाद सप्लायरों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं। इसके चलते काउंसिल ने प्रति यूनिट के दामों में बढ़ोतरी करने के आदेश जारी कर सभी जिला उपखंड चिकित्सा प्रभारियों को एक जनवरी ने नई दरों पर ही प्रति यूनिट खून मरीजों को देने का निर्देश दिया गया है। गर्भवती को डिलीवरी के समय सबसे ज्यादा ब्लड लगाया जाता है। 

ब्लडके दाम बढ़ाने का विरोध भी शुरू : ब्लडके दाम बढ़ाने का विरोध भी शुरू हो गया है। सोमनाथ भाजपा मंडल के अध्यक्ष राधेश्याम चौहान का कहना है कि लोगों का मानना है कि ब्लड की जरूरत उसी मरीज को रहती है, जो जिंदगी और और मौत के बीच जंग लड़ रहा हो। जब गेहूं पर सब्सिडी दी जा रही है तो खून पर क्यों नहीं। खाना तो एक दिन में एक वक्त मिले तब भी जिंदा रहा जा सकता है, लेकिन रक्त के बिना तो एक मिनट नहीं रहा जा सकता। अगर सरकार गरीब लोगों को सब्सिडी पर रक्त उपलब्ध करवाए तो इससे ब्लड बैंकों को भी राहत मिलेगी। हालांकि सरकारी अस्पतालों में निशुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन यहां से रैफर होने पर उसे निजी अस्पताल में जाना पड़ा तो उस पर अतिरिक्त भुगतान का भार पड़ेगा। 

गर्भवती,घायलों और थैलेसीमिया पीड़ितों को सबसे ज्यादा जरूरत : सबसेज्यादा ब्लड की जरूरत गर्भवती महिलाओं को होती है। इसके अलावा हादसों में घायल होने वाले लोगों को ब्लड की जरूरत पड़ती है। थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को भी हर माह ब्लड लगाने की जरूरत होती है। 

दो साल पहले बढ़ाए थे 250 रुपए 

काउंसिलने दो साल पहले ब्लड के दाम बढ़ाए थे। प्रति यूनिट 800 के बजाए 1050 रुपए के आदेश जारी किए थे। इस बार भी राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के आदेश जारी होने के बाद यह दरेंं बढ़ाई है। सरकार द्वारा ब्लड की हर थैली पर जीएसटी लगाया जा रहा है। इसी के कारण राजस्थान ब्लड कौंसिल ने ब्लड बैंकों से सुझाव मांगे गए थे। उसी के आधार पर यह दरे बढ़ाई जा रही है। दूसरा बिजली के रेट लगातार बढ़ रहे हैं। 

इस कारण कौंसिल को रेट बढ़ाने का सुझाव दिया ब्लड बैंकों ने ही दिए थे। 

^राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने आदेश जारी किए हैं। इसमें 1 जनवरी से नई दराें पर मरीजों को खून देने के लिए कहा गया है। हालांकि बांगड़ समेत सरकारी अस्पतालों में मरीजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। -डॉ. एमएस राजपुरोहित, पीएमओ, बांगड़ अस्पताल, 

^इसबारे में आदेश मिल गए हैं। यह आदेश 1 जनवरी 2018 से प्रभावी होंगे। पूर्व में 1050 रुपए प्रति यूनिट के लिए जा रहे हैं, नए आदेश से 1250 रुपए लिए जाएंगे। -डॉ. डीके जैन, प्रभारी ब्लड बैंक, बांगड़ अस्पताल, पाली

सोजत दुर्ग के सौंदर्यीकरण की मांग, केंद्रीय मंत्री चौधरी को ज्ञापन सौंपा

शहरके प्राचीनतम इतिहास के साक्षी सोजत दुर्ग की बिगड़ती दशा को सुधारने तथा बाग-बगीचे तैयार कर टेलीस्कोप लगाने के लिए यहां के सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों नागरिकों ने केंद्रीय विधि राज्यमंत्री सांसद पीपी चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि रखरखाव देखभाल के अभाव में सोजत का एेतिहासिक दुर्ग दिनोंदिन जीर्ण शीर्ण होता जा रहा है जगह-जगह से दीवारें दरकने के कगार पर है। उन्होंने बताया कि इस दुर्ग में तत्कालीन राजा-महाराजाओं की तोपें अन्य सामग्री जो यहां से पाली के बांगड़ म्यूजियम में ले जाई जा चुकी है। उसे वापस सोजत दुर्ग में भेजा जाए। इन एेतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण के लिए यहां पर एक म्यूजियम भी बनाया जाए ताकि स्थानीय नागरिकों के साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी मारवाड़ के गौरवमयी इतिहास से रूबरू हो सके। यहां पर बाग-बगीचों के साथ ऊंचाई से शहर का नजारा निहारने के लिए टेलीस्कोप भी लगाई जाए।