शीशे में देखकर आनंदपाल पर गोलियां चला रहे थे पुलिसवाले, ऐसा रहा घटनाक्रम

शीशे में देखकर आनंदपाल पर गोलियां चला रहे थे पुलिसवाले, ऐसा रहा घटनाक्रम

जयपुर। कुख्यात गैंगस्टर पांच लाख का इनामी बदमाश आनंदपाल सिंह को एसओजी टीम ने चूरू के मालासर में हुए एनकाउंटर में मार गिराया। आनंदपाल चूरू के मालासर में परिचित के पास फरारी काट रहा था। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि पुलिस की टीम ने शीशे में देखकर आनंदपाल को शूट किया था।

ऐसे चला था घटनाक्रम….

 शनिवार को 3:30 बजे चूरू एसपी राहुल बारहठ और कुचामन सीओ विद्याप्रकाश टीम को सूचना मिली कि आनंदपाल का भाई विक्की हरियाणा के सिरसा के शिवपुरा गांव में छुपा हुआ है।
– इस पर शाम 5:00 बजे चूरू एसपी राहुल की टीम सिरसा पहुंची। वहां से शाम 6:30 बजे विक्की को उठाया। उसके साथ ही साथी गुट्‌टू भी मिल गया।
– विक्की की पुलिस टीम ने पिटाई की तो उसने बताया कि आनंदपाल चूरू जिले में रतनगढ़ चूरू के बीच मलासर गांव में हाइवे पर स्थित घर में छुपा है।
– इसके बाद शाम 7:30 आनंदपाल को घेरने की योजना बनाई गई।
– रात को 10:00 बजे जैसे ही पुलिस फाेर्स मलासर पहुंची तो पहले से एएसपी कर्ण सिंह वहां पर थे एसओजी के संजीव भट्‌टनाागर नागौर की क्यूआरटी टीम पहुंची चुकी थी।
– रात 11:00 बजे आनंदपाल को पहले बाहर बुलाने का प्रयास हुआ, मगर उसे घिर जाने की भनक लग चुकी थी।
– इसलिए वह एके-47 लेकर खिड़की की तरफ आया। सामने सादा वर्दी में लोगों को देख वह समझ गया और गोलियां चलाना शुरू कर दिया।
– इसके बाद दोनों तरफ से करीब 20 मिनट तक फायरिंग हुई।
– रात 11.20 बजे मालासर में आनंदपाल का एनकाउंटर
चूरू एसपी राहुल बारहठ ने बताया कि करीब 20 मिनट तक फायरिंग होती रही।
– आनंदपाल की मौत रात करीब 11 बजे हुई।
– रात 1.40 बजे चूरू के एसपी ने एनकाउंटर की जानकारी दी।
– रात दो बजे एएफएसएल कीटीम मौके पर पहुंची।
एेसे शीशे में देखकर मारा था आनंदपाल को
– चूरू एसपी राहुल बारहठ ने रविवार को वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पुलिस की टीम ने शीशे में देखकर आनंदपाल पर गोलियां चलाई थी।
– एसपी राहुल ने बताया कि आनंदपाल पुलिस को देखकर घर के ऊपर वाले कमरे में चला गया था और सीढ़ियों में गोलियां चला रहा था।
– सीढ़ियों से आनंदपाल पुलिस को देख सकता था, लेकिन पुलिस को आनंदपाल दिखाई नहीं दे रहा था।
– इस पर एसपी राहुल घर के नीचे वाले कमरे में गए और बाथरुम में लगे शीशे को उठाकर सीढ़ियों इस तरह से लगाया की आनंंदपाल का अक्स शीशे में देखने लगा। शीशे से ही आनंदपाल की हर एक्टिविटी का पता चल गया।

 

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